पटना पहुंचा शारदा सिन्हा का पार्थिव शरीर, आज अंतिम दर्शन, गुलबी घाट पर कल सुबह होगा अंतिम संस्कार
जहां एक तरफ बिहार की मशहूर लोक गायिका और ‘बिहार कोकिला’ के नाम से प्रख्यात लोक गायिका शारदा सिन्हा का बीते मंगलवार रात दिल्ली AIIMS में निधन हो गया। वे 72 साल की थीं। वहीं छठ के गाए उनके गीत बेहद मशहूर हुए और इस पर्व के पहले ही दिन उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।
इस बीच आज यानी बुधवार को इंडिगो फ्लाइट से उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना लाया गया। दोपहर बाद पटना में इसे अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके पहले आज पटना के राजेंद्र नगर स्थित आवास पर शारदा सिन्हा का पार्थिव शरीर पहुंचा।
वहीं मिली खबर के अनुसार कल यानी गुरुवार 7 नवंबर को सुबह 8 बजे गुलबी घाट पर राजकीय सम्मान का साथ शारदा सिन्हा का अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुत्रों का मानें तो BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गुरुवार शाम शारदा सिन्हा के राजेन्द्र नगर स्थित घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
इस बाबत उनके बेटे अंशुमन ने उनके अंतिम संस्कार की जानकारी सोशल मीडिया पर दी थी। शारदा सिन्हा के निधन की जानकारी भी उनके बेटे ने सोशल मीडिया पर दी थी। इसके साथ ही बताया था कि जहां उनके पिता का अंतिम संस्कार हुआ था वहीं मां का भी होगा। एक महीने के अंतर पर ही अंशुमन ने अपने माता-पिता, दोनों को ही खो दिया है।
जानकारी दें कि, शारदा सिन्हा का एम्स अस्पताल में मल्टीपल मायलोमा (एक प्रकार का रक्त कैंसर) का उपचार किया जा रहा था और स्वास्थ्य जटिलताएं उत्पन्न होने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं को राज्य की सीमाओं से बाहर भी लोकप्रिय बनाने वालीं शारदा सिन्हा के कुछ प्रमुख गीतों में ‘‘छठी मैया आई ना दुआरिया”, ‘‘कार्तिक मास इजोरिया”, ‘‘द्वार छेकाई”, ‘‘पटना से”, और ‘‘कोयल बिन” शामिल थे।
इसके अलावा उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में भी गाना गया था। इनमें ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर- टू’ के ‘तार बिजली’, ‘हम आपके हैं कौन’ के ‘बाबुल’ और ‘मैंने प्यार किया’ के ‘कहे तो से सजना’ जैसे गाने शामिल हैं। शारदा सिन्हा के छठ पूजा गाए गीत भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उनका निधन चार दिवसीय छठ महापर्व के पहले दिन हुआ। किसी भी छठ घाट पर उनके गाये गीतों जरूर बजाये जाते थे।
बता दें कि, सिन्हा एक प्रशिक्षित शास्त्रीय गायिका थीं, जिन्होंने अपने कई गीतों में लोक संगीत का मिश्रण किया। उन्हें अक्सर ‘मिथिला की बेगम अख्तर’ कहा जाता था। वह हर साल छठ पर्व पर एक नया गीत जारी करती थीं। उन्होंने इस साल स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद भी उन्होंने छठ पर्व के लिए एक गीत जारी किया था। शारदा सिन्हा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उनके द्वारा गाया गया गीत ‘‘दुखवा मिटाईं छठी मईयां” एक दिन पहले ही साझा किया गया था। यह गीत शायद उनकी मनःस्थिति को दर्शाता है, जब वह खराब स्वास्थ्य से जूझ रही थीं।
शारदा सिन्हा साल 2017 से मल्टीपल मायलोमा से जूझ रही थीं और कुछ महीने पहले ही उनके पति का निधन हो गया था। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। शारदा सिन्हा ने भोजपुरी, मैथिली और मगही भाषाओं में लोकगीत गाए थे और उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रख्यात लोक गायिका शारदा सिन्हा के निधन पर शोक जताया और कहा कि उनका जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा था कि , “सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उनके गाए मैथिली और भोजपुरी के लोकगीत पिछले कई दशकों से बेहद लोकप्रिय रहे हैं।आस्था के महापर्व छठ से जुड़े उनके सुमधुर गीतों की गूंज भी सदैव बनी रहेगी। उनका जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!”
शारदा सिन्हा ने अपनी आवाज के माध्यम से लोक संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाना जारी रखा। हालांकि उन्होंने इस बात का ध्यान भी रखा कि वह कभी भी घटिया और द्विअर्थी गीत न गाएं।









