रामायणकालीन सीतामढ़ी मेला को मिली नई पहचान, लोगों ने MLC अशोक कुमार को दी बधाई

नवादा जिले के हिसुआ क्षेत्र के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों को एक नयी पहचान दिलाने की दिशा में हुई पहल का क्षेत्रवासियों ने स्वागत किया है. नवादा एमलसी अशोक कुमार व जिलाधिकारी रवि प्रकाश की पहल पर तमसा महोत्सव व सीतामढ़ी मेले को बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति / विभाग ने राज्य के सांस्कृतिक महोत्सव की सूची में शामिल करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है. इस उपलब्धि ने न केवल इन उत्सवों के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया है, बल्कि इन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है. मेसकौर का ग्रामीण और मगही संस्कृति का मेला सीतामढ़ी रामायण काल से जुड़ा हुआ है. माता सीता को श्रीराम के द्वारा निर्वासित किये जाने पर सीता के यहां निर्वासित होने के कई साक्ष्य है. सीतामढ़ी मंदिर।सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह मेला न केवल स्थानीय लोगों के लिए आस्था और उत्सव का केंद्र है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक जड़ें इसे एक अनूठी सांस्कृतिक धरोहर है. दूसरी ओर तिलैया उर्फ तमसा नदी घाट पर जेठान के दिन नदी और पर्यावरण बचाओ का संदेश के साथ आयोजित होने वाला तमसा महोत्सव हिसुआ की एक पहचान है.

जिले के तीन पर्यटन स्थलों को राजकीय दर्जा मिला है. तीन पर्यटन स्थलों में मेसकौर प्रखंड के सीतामढ़ी मेला, गोविंदपुर प्रखंड के ककोलत महोत्सव व हिसुआ प्रखंड के तमसा नदी महोत्सव को राजकीय दर्जा मिला है जिससे जिलावासियों में काफी खुशी है। एमएलसी अशोक कुमार ने बताया कि सदन के 209वां सत्र मेसकौर, ककोलत महोत्सव गोविंदपुर व तमसा नदी महोत्सव, हिसुआ को राजकीय दर्जा दिलाने की मांग को प्रमुखता से उठाई थी जिसकी अब प्रशासनिक स्वीकृति बिहार सरकार के पर्यटन विभाग से दे दी गयी है. लोगों ने राजकीय दर्जा दिलाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है. जिले के सभी लोगो ने कहा की सीतामढ़ी मेला अब प्रदेश के मुख्य पटल पर आयेगा. इससे जिलेवासियों को काफी लाभ मिलेगा. जिलेवासियों ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से दी गयी स्वीकृति को लेकर एमएलसी अशोक कुमार को बधाई दे रहें है।

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