14 साल की उम्र में BCCI में चयनित होकर रचा इतिहास
14 साल की उम्र में अक्षरा गुप्ता BCCI महिला क्रिकेट सीनियर टीम में जगह बना ली हैं. सबसे कम उम्र की कप्तान रह चुकी हैं. बिहार क्रिकेट को एक बार फिर कम उम्र की प्रतिभा पर गर्व करने का मौका मिला है. जैसे पुरुष क्रिकेट में 15 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने सबका ध्यान खींचा, वैसे ही महिला क्रिकेट में मोतिहारी के रक्सौल की रहने वाली अक्षरा गुप्ता ने इतिहास रच दिया है.

सीनियर महिला टीम में शामिल:
महज 14 वर्ष की उम्र में बिहार अंडर-19 टीम की कप्तानी करने वाली अक्षरा अब बिहार की सीनियर महिला टीम में शामिल हो गई हैं. वह टीम की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं. ईटीवी भारत से खास बातचीत में अक्षरा ने अपने सपनों और क्रिकेट के सफर को बताया.
बचपन से क्रिकेट का जुनून:
अक्षरा बताती हैं कि बचपन से ही वह अपने भाइयों और मोहल्ले के लड़कों को क्रिकेट खेलते देखती थी. धीरे-धीरे उन्होंने भी बल्ला थाम लिया और लड़कों के साथ खेलना शुरू कर दिया. मोहल्ले के मैदान में वह इकलौती लड़की होती थीं, लेकिन कभी पीछे नहीं हटी| क्रिकेट खेलना सिर्फ शौक नहीं बल्कि जुनून बन चुका था. साल 2020 से क्रिकेट के प्रति लगाव और गहरा हो गया, जब अंकल रामकृपा ने नियमित ट्रेनिंग देना शुरू किया.”-अक्षरा गुप्ता, क्रिकेटर
पिता चलाते हैं चिकन शॉप:
अक्षरा बताती है कि पिता राज किशोर शाह रक्सौल में चिकन शॉप चलाते हैं. मां रीना देवी गृहिणी हैं. पिता ने घर के पास गार्डन में नेट तैयार करवाया ताकि वह रोज अभ्यास कर सकें. मां रोज सुबह पांच बजे दूध का गिलास लेकर उन्हें जगाती थी, फिर रनिंग के लिए निकल जाती थी. माता-पिता ने कभी बेटा-बेटी में फर्क नहीं किया और हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. वह दो बहन और एक भाई हैं.
भाइयों के साथ खेलकर बनी मजबूत खिलाड़ी:
अक्षरा के लिए उनके चचेरे भाई ऋषभ शुरू से ही आइडल रहे हैं. ऋषभ उनसे उम्र में बड़े हैं और वर्तमान में बिहार टीम से खेल रहे हैं. भाइयों के साथ खेलने से उनमें आत्मविश्वास आया. यह भरोसा हुआ कि वह किसी से कम नहीं हैं. जब भी महिला खिलाड़ियों का ट्रायल होता, वह पूरे आत्मविश्वास के साथ जाती थी.
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अंडर-19 टीम में चयन और कप्तानी:
साल 2024 अक्षरा के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. ट्रायल के दौरान उनका चयन बिहार अंडर-19 महिला टीम में हुआ. इसके कुछ ही समय बाद उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी सौंप दी गई. 14 साल की उम्र में कप्तान बनना उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था. “जब कप्तान बनाया गया तो खुद पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन टीम मैनेजमेंट के फैसले ने मानसिक रूप से और मजबूत बना दिया. पूरी ईमानदारी से इस जिम्मेदारी को निभाया. कप्तानी का अनुभव क्रिकेट को और मजबूत किया.”-अक्षरा गुप्ता, क्रिकेटर
हरियाणा-पंजाब के खिलाफ बल्लेबाजी:
अंडर-19 स्तर पर अक्षरा ने हरियाणा और पंजाब जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया. उनकी बल्लेबाजी आक्रामक रही और कई अहम मौकों पर उन्होंने टीम को संभाला. अंडर-19 में उनके नाम कई अर्धशतक दर्ज हैं. अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जानी जाती है. स्पिन गेंदबाजों पर आगे बढ़कर खेलने में माहिर है.
स्मृति मंधाना और विराट कोहली से प्रेरणा:
अक्षरा का पसंदीदा शॉट कवर ड्राइव है. कवर में चौका लगाने में माहिर है. अक्षरा इंटरनेशनल क्रिकेट में स्मृति मंधाना और विराट कोहली को फॉलो करती हैं. कहती हैं कि स्मृति मंधाना की बल्लेबाजी उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरित करती है. वुमेन प्रीमियर लीग के सभी मैच वह नियमित रूप से देखती हैं.
सबसे कम उम्र की कप्तान बनीं:
अक्षरा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की बड़ी फैन हैं. लेफ्ट हैंड बल्लेबाज और लेफ्ट आर्म गेंदबाज अक्षरा का मानना है कि आक्रामक क्रिकेट ही आज के दौर की पहचान है और वह उसी शैली में खुद को तैयार कर रही हैं. बीते दिनों अंदर-19 टीम के बेंगलुरु दौरे के दौरान अक्षरा अपनी टीम की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी कप्तान थी.
“यह अनुभव खास रहा. कप्तानी ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया है. दबाव में भी खुद को संभाल पाती हूं. टीम की जिम्मेदारी उठाना आसान नहीं था, लेकिन हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की.”-अक्षरा गुप्ता, क्रिकेटर

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अब सीनियर टीम का टिकट मिला:
अक्षरा का चयन अब बिहार की सीनियर महिला टीम में हो चुका है. इस खबर से वह बेहद खुश हैं. जल्द ही बिहार टीम का उड़ीसा दौरा प्रस्तावित है, जहां वनडे मैच खेले जाएंगे. इसके लिए अक्षरा लगातार अभ्यास कर रही हैं. उनका कहना है कि सीनियर टीम में खेलना उनके लिए एक नई चुनौती है, लेकिन वह इसे अवसर के रूप में देखती हैं.
टीम इंडिया तक पहुंचने का सपना:
अक्षरा का सपना सिर्फ बिहार टीम तक सीमित नहीं है. वह चाहती हैं कि आने वाले एक से डेढ़ साल में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाएं. वह मानती हैं कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन और उनके माता-पिता के सहयोग के बिना यह संभव नहीं था.
“हर स्तर पर सपोर्ट मिला है. यही वजह है कि आज सीनियर टीम तक पहुंच पाई हूं. अब नजर आगामी मुकाबलों पर है. लक्ष्य एक ही है कि लगातार अच्छा खेलकर टीम इंडिया की जर्सी पहनना.”-अक्षरा गुप्ता, क्रिकेटर
गांव से निकलकर देश तक का सफर:
रक्सौल जैसे छोटे कस्बे से निकलकर राज्य और अब सीनियर स्तर तक पहुंचना आसान नहीं था. लेकिन अक्षरा की मेहनत, परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास ने इस सफर को संभव बनाया. वह आज उन लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर क्रिकेट में नाम कमाना चाहती हैं.
हौसले मजबूत हों, तो मंजिल मिल जाती है:
अक्षरा कहती हैं कि अगर सपने बड़े हों और हौसले मजबूत हों, तो मंजिल मिल ही जाती है. उन्होंने बताया कि बचपन से अब तक चाहे पड़ोसी हो या उनके रिलेटिव, किसी ने यह नहीं कहा कि लड़की हो तो नहीं हो सकता है. बचपन से ही सभी ने उन्हें लड़कों के साथ कंपीट कराया और आज वह इतना अच्छा क्रिकेट खेल पा रही हैं.









