11 साल से फरार जाली नोट गिरोह का मास्टरमाइंड समस्तीपुर से गिरफ्तार
जाली नोटों के कारोबार से जुड़े मामले केवल देश के आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं होते, बल्कि इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी देखा जाता है. 2014 के बाद से सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की है. इसी कड़ी में बिहार के समस्तीपुर में दो लाख के इनामी NIA वांछित को समस्तीपुर के पटोरी इलाके से गिरफ्तार किया गया है. यह मामला दुबई स्थित पाकिस्तानी नागरिक से जुड़े नेटवर्क और उच्च गुणवत्ता वाले नकली भारतीय नोटों की तस्करी से जुड़ा हुआ है.
समस्तीपुर. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) ने नकली भारतीय जाली नोट (नकली भारतीय मुद्रा तस्करी) से जुड़े एक पुराने मामले में बड़ी कामयाबी हासिल की है. 2014 से फरार चल रहे नेपाल के बारा जिले के नूर मोहम्मद को बिहार के समस्तीपुर जिले से गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान और मामले की जानकारी आरोपी की पहचान बारा (नेपाल) के ऐश मोहम्मद के बेटे नूर मोहम्मद के रूप में हुई है. वह NIA के केस नंबर RC-02/2014/NIA/DLI में वांछित था और जाली भारतीय मुद्रा (FICN) रैकेट से जुड़ा बताया जाता है. उस पर NIA की ओर से दो लाख रुपये का इनाम घोषित था.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अप्रैल 2014 का है जब नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Indira Gandhi International Airport) पर एक हजार रुपये के 4,988 नकली नोट जब्त किए गए थे. इनकी कुल कीमत 49 लाख 88 हजार रुपये थी. जांच में सामने आया कि यह खेप 17 और 18 अप्रैल 2014 को दुबई से भारत लाई गई थी. प्रारंभिक एफआईआर के बाद मामले को एनआईए ने अपने हाथ में लिया. जून 2014 में एनआईए ने आईपीसी और गैर कानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरसी 02/2014/NIA/DLI के रूप में केस दर्ज किया. जांच में अंतरराष्ट्रीय लिंक सामने आने के बाद एजेंसी ने इसे संगठित नेटवर्क से जुड़ा मामला माना.
दुबई और पाकिस्तान कनेक्शन:
एनआईए जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि नकली नोटों की आपूर्ति दुबई स्थित एक पाकिस्तानी नागरिक के जरिए की जा रही थी. जांच एजेंसी के अनुसार यह नेटवर्क भारत में उच्च गुणवत्ता वाले फर्जी नोट पहुंचाने की साजिश में शामिल था. ऐसे मामलों को सुरक्षा एजेंसियां केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा खतरा मानती हैं, क्योंकि फर्जी मुद्रा का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और अवैध नेटवर्क को फंडिंग में किया जा सकता है.
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी:
जानकारी के अनुसार, . टीम ने पटोरी थाना क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाते हुए संदिग्ध गतिविधियों की जांच शुरू की. प्रारंभिक सत्यापन के बाद 28 फरवरी 2026 को नूर मोहम्मद को पूछताछ के लिए डिटेन किया गया. इसकी सूचना NIA को दे दी गई है. NIA की टीम द्वारा सत्यापन के उपरांत ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया की जा रही है.

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जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में FICN नेटवर्क के खिलाफ बिहार पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. इससे पूर्व भी NIA द्वारा घोषित इनामी अंतरराष्ट्रीय तस्करों की गिरफ्तारी की जा चुकी है. नूर मोहम्मद की हिरासत को इसी कड़ी में बड़ी सफलता माना जा रहा है. पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई और पूछताछ में जुटी हुई है.









