चर्चित मनरेगा के कनीय अभियंता उज्ज्वल राज की हत्या, पटना हाईकोर्ट ने 5 अभियुक्तों को किया बरी,9 साल पहले हुई थी हत्या,
शेखपुरा। चर्चित मनरेगा के कनीय अभियंता उज्जवल राज की सरेशाम गोली मार कर हत्या के मामले में जिला न्यायालय से सजा प्राप्त पांच लोगों को पटना उच्च न्यायालय द्वारा बड़ी राहत मिली है। इन सभी को पटना उच्च न्यायालय द्वारा बरी कर दिया गया। इस प्रकार 9 साल पहले की इस घटना का पटाक्षेप हो गया ।पटना उच्च न्यायालय के खंड पीठ न्यायमूर्ति बिवेक चौधरी और चंद्रशेखर झा ने यह आदेश पारित किया। 17 जनवरी 2017 को संध्या शहर के स्टेशन रोड स्थित मरिया आश्रम के निकट संध्या 6:00 बजे गोली मार कर कनीय अभियंता उज्जवल राज के हत्या हो जाने को लेकर पूरे जिले में खलबली मच गई थी।
इस मामले में 15 जुलाई 2019 को जिला न्यायालय के एडीजे प्रथम ने भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा दी थी। रिहा होने वाले सदर प्रखंड कारे गांव के बालमुकुंद यादव उर्फ रविकांत ,अरियरी थाना क्षेत्र के इटहरा गांव निवासी सुनील कुमार नगर क्षेत्र इंदाय के रहने वाले धर्मेंद्र पासवान नंदन यादव और राजू कुमार उर्फ नरेंद्र कुमार राजू हैं। यहां से सजा पाने के बाद इन सभी ने पटना उच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती दी थी। इस पर अंतिम सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति द्वय ने मृत्यु के पूर्व उज्जवल राज द्वारा पुलिस के समक्ष दिए गए मृत्यु पूर्व बयान को ठोस साक्ष्य मानने से इनकार कर दिया।
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9 साल पहले हुई थी हत्या
पटना उच्च न्यायालय में इस मामले में मृतक के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के कथन और पुलिस द्वारा मृत्यु पूर्व कथन में विरोधाभास पाते हुए उसे सही मानने से इनकार कर दिया। खंडपीठ ने इस मामले में जिला न्यायालय के सत्र न्यायाधीश द्वारा मृत्यु पूर्व बयान को साक्ष्य में शामिल करने के मामले पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। इस मामले की अंतिम विवेचना करते हुए न्यायमूर्ति ने बताया कि अभियंता को निकट से गोली मारी गई थी और गोली ऐसे महत्वपूर्ण अंग पर लगे थे। जिससे उसकी तुरंत मृत्यु हो गई इस परिस्थिति में उनके द्वारा कोई भी मृत्यु पूर्व बयान देना संभव नहीं था।
इसके अलावा मृत्यु पूर्व बयान पर मृतक के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान भी प्राप्त नहीं किया गया। वैसे भी कानून के द्वारा स्थापित नियमों के तहत पुलिस के समक्ष दिए गए बयान की साक्ष्य में कोई कीमत नहीं है। पटना उच्च न्यायालय द्वारा इस आदेश के बाद इस मामले के रिहा हुए सभी व्यक्तियों ने हर्ष व्यक्त किया है। और बताया कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरी आस्था थी जिसे उन्हें आज न्याय प्राप्त हुआ है।









