नालंदा में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, 12 हजार रुपये रिश्वत लेते अधिकारी गिरफ्तार
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी को रंगे हाथ पकड़ा, 2026 में अब तक 23 गिरफ्तारी
क्या है पूरा मामला?
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई हुई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना की टीम ने नालंदा जिले में एक प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 20 मार्च 2026 को की गई, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत से गिरफ्तारी तक
मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई। नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड के निवासी अजय कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी श्रीमती अनुका उनसे छठ घाट निर्माण में आपूर्ति की गई सामग्री के भुगतान के बदले 12,000 रुपये की रिश्वत मांग रही थीं।
शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया। जांच के दौरान यह पाया गया कि अधिकारी ने सच में रिश्वत मांगी थी। इसके बाद निगरानी टीम ने तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई।
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कैसे हुई गिरफ्तारी?
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। जैसे ही आरोपी अधिकारी ने 12,000 रुपये रिश्वत के रूप में स्वीकार किए, उन्हें उनके कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना में पेश किया जाएगा।
2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में यह 34वीं प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें से 29 मामले ट्रैप (रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ने) से जुड़े हैं। अब तक कुल 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
ब्यूरो ने बताया कि इस वर्ष अब तक कुल 8,84,000 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हो रही है।
क्या कहता है यह मामला?
यह घटना एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में पारदर्शिता कितनी जरूरी है। जहां सरकार भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामले बताते हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी सुधार की जरूरत है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश मिला है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी अधिकारी को नहीं बख्शा जाएगा। अगर आम लोग जागरूक होकर शिकायत करें, तो ऐसी कार्रवाई संभव है और व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।









