लखीसराय। जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र की अध्यक्षता में अग्नि सुरक्षा की दृष्टि से होटल/रेस्टोरेंट/हॉस्पिटल में अग्नि सुरक्षा प्रबंधन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन समाहरणालय स्थित मंत्रणा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि फैक्ट्रियों, ऑफिस, हॉस्पिटल, स्कूल कॉलेज, घर या फ्लैट, चलती कार, बस या मोटर बाइक, खेत खलिहान, झुग्गी झोपड़ियां इत्यादि में आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। आग से बचाव हेतु कार्यशाला में बताया गया कि किसी भी प्रकार की अग्नि दुर्घटना हो तो सबसे पहले 101/112 पर डायल करें ताकि अग्निशमन की टीम मौके पर पहुंच कर सुरक्षात्मक करवाई कर सके। इसके साथ ही देवेंद्र कुमार एवं उनकी टीम के द्वारा मॉक ड्रिल के माध्यम से अग्नि सुरक्षा से बचाव हेतु विभिन्न प्रकार के उपाय बताए गए। जैसे – झुग्गी झोपड़ियों में अग्नि दुर्घटना से बचाव हेतु बताया गया कि झुग्गी झोपड़ी बनाने में जलने वाली सामग्री का इस्तेमाल न करें, जैसे प्लास्टिक शीट, कपड़ा, तिरपाल आदि।
झोपड़ी के आसपास सूखा घास लकड़ी या अन्य ज्वलनशील सामग्री ना रखें।
खाना पकाने के दौरान ईंधन को सुरक्षित स्थान पर रखें।
बिजली के तारों को ठीक से ढकें।
क्षतिग्रस्त तारों को तुरंत बदलें।
भवनों में अग्नि सुरक्षा से बचाव हेतु बताया गया कि
नए भवनों का निर्माण नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुरूप करें
विद्युत प्रभार के अनुपात में ही भवनों में मानक विद्युत तार व उपकरण लगाए, तथा समय-समय पर जांच कराएं
पुराने भवनों का फायर ऑडिट कराए तथा अग्निशमन विभाग द्वारा दिए गए निदेशों, सुझावों का पालन करें।
भवनों में अग्नि सुरक्षा योजनाओं को ऐसे स्थान पर दर्शाए जिससे लोगों को समझने में आसानी हो ।
भवनों के प्रवेश तथा निकास को किसी भी परिस्थिति में अवरुद्ध न करें।
भवनों में विद्युत आपूर्ति के तार हवा में झूलते ना रहे।
भवनों में जलते हुए सिगरेट आदि के टुकड़े यत्र तत्र न फेंके।
भवनों में अनावश्यक रूप से कुरा करकट सामानों, ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण किसी भी परिस्थिति में ना करें।
बहु मंजिली इमारत में अग्नि सुरक्षा से बचाव हेतु बताया गया की फ्लैट में लगे अग्निशमन यंत्र और अन्य सुरक्षा उपकरणों के नियमित रूप से जांच करें।
पुराने भवनों का फायर ऑडिट कराए एवं अग्निशमन विभाग द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों, सुझावों का अनुपालन करें।
भवनों में लगे फायर एग्जिट के मार्ग को बाधित न करें।
मवेशियों के लिए आग से सुरक्षा से बचाव में बताया गया कि मवेशियों का घर एस्बेस्टस का बनाएं क्योंकि यह आग प्रतिरोधी होता है।
मवेशी को हमेशा जूट की रस्सी से ही बांधे।
जानवरों को रखने वाले घरों के नजदीक पानी का पर्याप्त भंडार रखना चाहिए।
खूंटे पशु के क्षमता अनुसार रखें ताकि आपात स्थिति में जानवर उसे खूंटे को उखाड़ कर आसानी से भाग सके।
ज्वलनशील पदार्थों को आश्रय से दूर रखें।
पशुओं के आश्रय स्थल के आसपास धूम्रपान न करें।
गैस सिलेंडर की आग से सुरक्षा एवं बचाव के बारे में बताया गया की
गैस सिलेंडर लेते समय पानी से जांच कर लें कि बुलबुला दे रहा है या नहीं।
रसोई में सिलेंडर को हमेशा सीधा खड़ा करके रखें।
जलते हुए चूल्हे को पहले रेगुलेटर से उसके बाद वॉल्व से बंद करें।
रेगुलेटर का पाइप नियमित रूप से साफ करें एवं समय पर पाइप बदलें।
अगर रसोई में गैस की गंध आ रही हो तो इलेक्ट्रिक पैनल स्विच के साथ छेड़छाड़ ना करें।
रसोई में एक सूती कपड़ा हमेशा भिगोकर रखें ताकि आपात स्थिति में आग लगने पर बुझाया जा सके।
खाना बनाते समय एक बाल्टी पानी भरकर अवश्य रखें।
चूल्हे पर उबलते हुए चाय, दूध आदि को छोड़कर रसोई से बाहर न जाए।
खाना बनाते समय चूल्हे पर रखे गर्म बर्तन को पल्लू से नहीं पकड़ें।
कपड़ों में आग लगने पर घबराएं नहीं बल्कि जमीन पर लुढ़के या फिर कंबल से लपेट कर बुझाए।
आज की कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक अजय कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार, प्रभारी पदाधिकारी आपदा प्रबंधन शशि कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी विनोद प्रसाद, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी सुश्री प्राची कुमारी, जिला खेल पदाधिकारी रवि कुमार, सिविल सर्जन बी.पी. सिन्हा, जिला शिक्षा पदाधिकारी यदुवंश राम, स्थानीय होटल/ रेस्टोरेंट/ हॉस्पिटल के प्रबंधक/ प्रतिनिधि एवं अग्निशमन की पूरी टीम उपस्थित रहे।









