लखीसराय वासियों को मिली आवागमन के लिए आईएएस की सीढ़ी*

लखीसराय -एस० के० गांधी। जिले के तेज -तर्रार 41वें आईएएस जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र का बीते 11सितंबर 2024 को योगदान देते ही खासकर लखीसराय से किउल रेलवे स्टेशन तक रेलवे फुटपाथ ब्रीज से आवागमन के लिए लखीसराय वासियों को आईएएस की सिढी बनवाकर पहला उपहार भेंट किया गया है। शायद इससे पहले तक जिला प्रशासन की ओर से रेलवे में किसी प्रकार के निर्माण कार्य के लिए एन ओ सी एवं अन्य कागजातों का हवाला देकर किउल एवं लखीसराय के लोगों को रेलवे की हिटलरशाही पर छोड़ दिया जाता था। लेकिन नये डीएम का योगदान देते ही एक आईएएस के पावर को आईआरएस वालों को नसीहत दी गई। क्रमानुसार डीएम के द्वारा लखीसराय से किउल आवागमन के लिए पहली दफा ह्यूम पाईप लगाकर किउल डायवर्सन अप्रोच महामार्ग का निर्माण कार्य करवाया गया। जिस पर आम लोगों के द्वारा लगभग 7महीने तक लखीसराय से किउल तक नदी के डायवर्सन महामार्ग से आवागमन किया गया। हालांकि फिलहाल किउल नदी में बरसात का पानी आने के चलते अब डायवर्सन महामार्ग पूर्णतः जलमग्न हो गया है। फलत: अब इस रास्ते से आम जनता का आवागमन बंद है।

इस दौरान अब लोगों के द्वारा किउल -लखीसराय के बीच बने रेलवे की संकीर्ण फुटपाथ ब्रीज से ही काफी मशक्कत से आवागमन करनी होती है। जिसमें लखीसराय उतरने वाले स्थान पर डीएम मिथिलेश मिश्र के निर्देश पर लखीसराय नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी अमित कुमार की ओर से रेलवे से समन्वय बनाकर उक्त सीढ़ी का निर्माण करवाया गया। इसके अलावा रेलवे ब्रिज अर्थात शहीद द्वार के समीप साफ- सफाई, सौंदर्यीकरण, लाईटिंग, पेयजल, तिरंग एलईडी लाइट, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक पोस्ट, रंगाई-पुताई आदि रिमांड लिंग कर लखीसराय रेलवे स्टेशन परिसर को भी हाईटेक एवं स्मार्ट बनाया गया है। इस दौरान आईएएस जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्रा ने रेलवे को दो टूक लहजे में विधि व्यवस्था संधारण की दृष्टि कोण से समन्वय बनाए रखने की कड़ी नसीहत तक दे डाली। वरन बरसात के दिनों में पैदल किउल -लखीसराय आवागमन करने में भी लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। हालांकि दो पहिए एवं चार पहिए वाहनों का विद्यापीठ चौक के रास्ते लगभग 7किलो मीटर लंबी दूरी तय कर आवागमन करनी पड़ती है।इस बीच नये डीएम की विशेष पहल पर ही लखीसराय से किउल तक आवागमन के लिए किउल नदी पर स्थायी पुल के अलावा वेली पुल एवं अन्य संपर्क सड़कों और पुलिया निर्माण की प्रक्रिया जारी है। शायद इसी कारण से जनसामान्य की ओर से रेलवे कैंपस में निर्मित इस सीढ़ी को आईएएस का सीढ़ी के नाम से मशहूर कर दिया गया है।

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