आशा की करनी और स्वास्थ्य विभाग की लाचर व्यवस्था की शिकार हुई फिर एक महिला को गबानी पड़ी जान
सड़क छाप अस्पताल की करतूत से फिर एक महिला नवजात को जन्म देकर सो गई मौत की नींद
शेखपुरा. जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार सवाल खडे हो रहे हैं. वहीं आशा की करनी का भुक्त भोगी भी कुछ लोगों को बनना पड़ रहा है. जिसका जीता जागता उदाहरण दल्लु चौक स्थित कई निजी क्लिनिक बन रहा है. आय दिन किसी न किसी का जान कभी इलाज तो कभी प्रसव के दौरान जा रहा है. आज भी एक महिला को झोलाछाप चिकित्स्क का शिकार होना पड़ा और उसका नवजात जन्म के बाद ही बिना मां का हो गया.
थाना और सदर अस्पताल से महज कुछ ही दुरी पर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस मामले पर मुख दर्शक बना बैठा है. आज भी दल्लु चौक स्थित अनन्या क्लिनिक जो पहले सवित्री अस्पताल के नाम से चल रहा था और वहां कई मौत हो चुकी थी. आज अस्पताल शुरू होने के दस दिन बाद ही फिर से उस अस्पताल के चिकित्स्क ने एक महिला की जान ले ली है. दरसल फर्जी डॉक्टर के ऑपरेशन से गर्भवती महिला की मौत हो गई. जिसके बाद अनन्या अस्पताल में हंगामा के बाद डॉक्टर क्लिनिक छोड़कर फरार हो गया. पूरा मामला है की यह घटना आशा के कहने पर निजी अस्पताल में गर्भवती महिला को लेकर परिजन गए थे. बताते चलें की भोजडीह रोड में दल्लु चौक पर एक निजी अस्पताल में एक फर्जी डॉक्टर की लापरवाही के कारण एक 20 वर्षीय गर्भवती महिला की मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
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महिला नवजात को जन्म देकर सो गई मौत की नींद
हंगामा बढ़ता देख अस्पताल का डॉक्टर और कर्मी अस्पताल बंद कर मौके से फरार हो गए। मृतका की पहचान नवादा जिले के काशीचक थाना क्षेत्र के चंडीनमा गांव निवासी राज मांझी की पत्नी सोनी देवी के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने के बाद सोनी देवी को भोजडीह रोड स्थित अनन्या हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के समय अस्पताल संचालक द्वारा 51 हजार रुपये जमा करा लिए गए और बड़े ऑपरेशन के जरिए बच्चे की डिलीवरी कराने की बात कही गई। परिजनों के अनुसार ऑपरेशन शुरू करने के बाद डॉक्टर ने दो यूनिट खून की व्यवस्था करने को कहा। परिजन काफी मशक्कत के बाद अलग-अलग अस्पतालों का चक्कर लगाकर दो यूनिट रक्त लेकर पहुंचे। इसके बाद भी अस्पताल ने मरीज की स्थिति गंभीर बताते हुए उसे दूसरे बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया। समय कम होने के कारण परिजन आनन-फानन में एंबुलेंस से उसे बिहारशरीफ के एक निजी अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और वापस अनन्या हॉस्पिटल पहुंचकर हंगामा करने लगे। इसी बीच मौका पाकर डॉक्टर और अस्पताल के कर्मचारी अस्पताल में ताला बंद कर फरार हो गए। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
प्रसूता की मौत का जिम्मेदार कौन?
परिजनों ने जानकारी देते हुए बताया की महिला अपने ननिहाल अरियरी गागौरा में रह रही थी और पास के गांव अरुआरा की आशा सुनीता कुमारी ने उसे बहला फुसलाकर अनन्या अस्पताल में सुबह करीब तीन बजे भर्ती करवाया था. स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही इसी हॉस्पिटल के समीप स्थित मां सावित्री हॉस्पिटल को प्रशासन ने सील किया था। आरोप है कि उसी अस्पताल से जुड़े डॉक्टर द्वारा चोरी-छिपे अनन्या अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। बताया जाता है कि शेखपुरा के पटेल चौक से भौजडीह रोड तक दर्जनों निजी क्लीनिक बिना लाइसेंस और आवश्यक कागजात के संचालित हो रहे हैं। आए दिन इन अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की मौत और हंगामे की घटना सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से ऐसे अस्पताल लगातार फल-फूल रहे हैं। फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद सुचना मिलते ही टाउन थाना की पुलिस मौके पर पहुंचकर शव कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. टाउन थाना के एसआई पंकज कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया की अस्पताल की लापरवाही से महिला की मौत की बात कही जा रही है. फिलहाल सभी बिंदु पर पुलिस जांच कर रही है. वहीं सावित्री अस्पताल और अनन्या अस्पताल के एक होने के सवाल पर दरोगा पंकज सिंह ने बताया कि यह जांच का विषय है और जांचों परान थी कुछ कहा जा सकता









