भारत में LPG सिलेंडर के बढ़े दाम – आम जनता पर बढ़ता आर्थिक दबाव
घरेलू और कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी, जानिए इसके कारण और असर
भारत में रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस बढ़ोतरी ने आम जनता के बजट पर सीधा असर डाला है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है। गैस सिलेंडर हर घर की जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने से घरेलू खर्च भी बढ़ जाता है।
घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी
देश के कई बड़े शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में लगभग ₹60 की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में पहले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹853 थी, जो अब बढ़कर ₹913 हो गई है। इसी तरह कोलकाता में पहले यह कीमत ₹879 थी, जो अब ₹939 हो गई है। मुंबई में पहले ₹852.50 का सिलेंडर अब ₹912.50 में मिल रहा है, जबकि चेन्नई में कीमत ₹868.50 से बढ़कर ₹928.50 हो गई है।
इस बढ़ोतरी से आम परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है, क्योंकि कई घरों में हर महीने एक या दो सिलेंडर की जरूरत पड़ती है।
कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत भी बढ़ी
घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों द्वारा किया जाता है।
दिल्ली में पहले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1,768.50 थी, जो अब बढ़कर ₹1,883 हो गई है। कोलकाता में कीमत ₹1,875.50 से बढ़कर ₹1,990 हो गई है। मुंबई में यह ₹1,720.50 से बढ़कर ₹1,835 हो गई है, जबकि चेन्नई में इसकी कीमत ₹1,929 से बढ़कर ₹2,043.50 हो गई है।
कमर्शियल गैस महंगी होने का असर होटल और रेस्टोरेंट के खाने की कीमतों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि व्यापारियों को बढ़ी लागत को कवर करना पड़ता है।
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https://biharbulletin24.in/strict-action-against-illegal-hoardings-and-banners/
कीमत बढ़ने के पीछे मुख्य कारण
LPG की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों का बढ़ना है। जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत जैसे आयात करने वाले देशों पर पड़ता है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और तनाव भी ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है। भारत अपनी गैस का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए आयात लागत बढ़ने से घरेलू कीमतों में भी बढ़ोतरी हो जाती है।
वैश्विक शिपिंग रूट में अनिश्चितता और परिवहन लागत में बढ़ोतरी भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इसके साथ ही सरकार को सब्सिडी और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी कीमतों में बदलाव करना पड़ता है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
LPG की कीमत बढ़ने से सीधे तौर पर आम लोगों के खर्च में बढ़ोतरी होती है। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह एक अतिरिक्त बोझ बन सकता है। वहीं दूसरी ओर, कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल और छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
हालांकि सरकार समय-समय पर सब्सिडी और अन्य योजनाओं के माध्यम से राहत देने की कोशिश करती है, लेकिन लगातार बढ़ती ऊर्जा कीमतें एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।









