कांजीवरम नटराजनअन्नादुराई तमिलनाडु की राजनीति केभीष्म पितामह
तमिलनाडु की राजनीति के ‘भीष्म पितामह’, महान समाज सुधारक और द्रविड़ आंदोलन के सशक्त स्तंभ—कांजीवरम नटराजन अन्नादुराई (C.N. Annadurai)। उन्हें पूरे दक्षिण भारत में बड़े सम्मान से ‘अरिग्नार अन्ना’ (विद्वान अन्ना) या सिर्फ ‘अन्ना’ (बड़े भाई) के नाम से जाना जाता है। वे आधुनिक तमिलनाडु के वैचारिक और राजनीतिक शिल्पकार थे।
अन्ना का जन्म 15 सितंबर 1909 को तमिलनाडु के कांजीवरम में हुआ था। वे एक साधारण बुनकर परिवार से थे, लेकिन अपनी मेधा और वाक्पटुता के दम पर उन्होंने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी।
प्रमुख उपलब्धियाँ और ऐतिहासिक योगदान:
DMK की स्थापना (1949): उन्होंने ई.वी. रामास्वामी ‘पेरियार’ के साथ वैचारिक मतभेदों के बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की नींव रखी। यह भारत का पहला ऐसा क्षेत्रीय दल बना जिसने केंद्र में कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती दी और राज्य की सत्ता संभाली।
तमिलनाडु का नामकरण: 1967 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने ‘मद्रास राज्य’ का नाम बदलकर ‘तमिलनाडु’ (तमिल लोगों की भूमि) किया, जो तमिल पहचान और गौरव का प्रतीक बना।
द्वि-भाषा नीति (Two-Language Formula): उन्होंने तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने का कड़ा विरोध किया और ‘तमिल’ व ‘अंग्रेजी’ की द्वि-भाषा नीति लागू की, जो आज भी राज्य में प्रभावी है।
आत्म-सम्मान विवाह (Self-Respect Marriages): उन्होंने ऐसे विवाहों को कानूनी मान्यता दी जिनमें ब्राह्मण पुजारियों या धार्मिक कर्मकांडों की आवश्यकता नहीं होती थी। यह सामाजिक समानता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।डीएम ने की राजस्व एवं भूमि अतिक्रमण की समीक्षा

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महान वक्ता और लेखक:
अन्ना अपनी ओजस्वी वाणी और तमिल साहित्य पर पकड़ के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने कई नाटक और फिल्में लिखीं, जिनका उपयोग उन्होंने द्रविड़ विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए किया।
अन्ना का दर्शन:
अन्नादुराई का मानना था कि लोकतंत्र में क्षेत्रीय पहचान और भाषाई गौरव को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। वे एक कट्टर तर्कवादी (Rationalist) थे और अंधविश्वासों के कड़े विरोधी थे।
“समाज में बदलाव तभी संभव है जब हम अपनी जड़ों का सम्मान करें और शिक्षा को हर गरीब के दरवाजे तक पहुँचाएँ।”
विरासत:
चेन्नई का प्रसिद्ध ‘अन्ना सलाई’ (माउंट रोड) और ‘अन्ना विश्वविद्यालय’ उन्हीं के सम्मान में नामित हैं। उनके अंतिम संस्कार में लगभग 1.5 करोड़ लोग शामिल हुए थे, जो उस समय दुनिया का सबसे बड़ा शोक-संग्रह (Funeral Attendance) माना गया था।
अरिग्नार अन्ना का जीवन सादगी, बौद्धिकता और सामाजिक न्याय की एक अमर गाथा है। तमिलनाडु के इस ‘बड़े भाई’ और महान नेता को हमारा सादर नमन!









